अवतारी पुरुष एवं जन-जन की आस्था के प्रतीक बाबा रामदेव जी ने अपना समाधी स्थल, अपनी कर्मस्थली रामदेवरा (रूणीचा) को ही चुना. बाबा ने यहाँ पर भादवा सुदी 11 वि.सं. 1442 को जीवित समाधी ली.समाधी लेते समय बाबा ने अपने भक्तों को शान्ति
एवं अमन से रहने की सलाह देते हुए जीवन के उच्च आदर्शों से
अवगत कराया. बाबा ने जिस स्थल पर समाधी ली थी, उस स्थल पर बीकानेर के राजा गंगासिंह ने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया
इस मंदिर में बाबा की समाधी के अलावा उनके परिवार वालो की समाधियाँ भी स्थित है. मंदिर परिसर में बाबा की मुंहबोली बहिन डाली बाई की समाधी, डालीबाई का कंगन एवं राम झरोखा भी स्थित हैं |
रामसरोवर
रामसरोवर बाबा रामदेव मंदिर के पीछे की तरफ आया हुआ हैं. यह तक़रीबन 150 एकड़ क्षेत्र में फेला हुआ हैं एवं 25 फिट गहरा हैं. बारिश से पूरा भरने पर यह सरोवर बहुत ही रमणीय स्थल बन जाता हैं. मान्यता हैं कि बाबा ने गूंदली जाति के बेलदारों }kjk इस
तालाब की खुदाई करवाई थी. यह तालाब पुरे रामदेवरा जलापूर्ति का
स्रोत हैं, कहते हैं जांभोजी के श्राप के कारण यह सरोवर मात्र छः(6) माह ही भरा रहता हैं. भक्तजन यंहा आकर इस सरोवर में डूबकी लगा कर अपनी काया को पवित्र करते हैं एवं इसका जल अपने साथ ले जाते हैं तथा नित्य आचमन करते हैं |