मान्यताएं :
 
पैदल चलने की होड़

रामदेवरा (रूणीचा) में प्रतिवर्ष भादवा माह में एक माह तक चलने वाला मेला आयोजित होता है. इस मेले में लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते है. ये श्रद्धालु अपने-अपने घरों से बाबा के दरबार तक का सफ़र पैदल तय करते है .कोई पुत्ररत्न की चाह में तो कोई रोग कष्ट निवारण

हेतु,कोई घर की सुख-शान्ति हेतु यह मान्यता लेकर की बाबा के दरबार में पैदल जाने वाले भक्त को बाबा कभी खाली हाथ नहीं भेजते यहा पर आते है . पैदल श्रद्धालु अमुमन एक संघ के साथ ही यात्रा करते है और इस संघ के साथ अन्य श्रद्धालु भी मार्ग में जुड़ते जाते है. सभी पैदल यात्री बाबा के जयकारे लगाते, नाचते गाते हुए यात्रा करते है. रात्रि ठहराह के समय ये उस ठहराह स्थल में जम्मा जागरण भी करते है. जब ये पैदल यात्री अपनी यात्रा पूर्ण करके रामदेवरा पहुंचते है तो इनके माथे पर ज़रा सी भी थकान या सिकन दिखाई नहीं देती,बल्कि और भी अधिक जोश के साथ बाबा के जय का उदगोष करते हुए ये भक्तजन बाबा के दर्शन हेतु मीलों लम्बी कतारों में लग जाते है |

 
चप्पल छोड़ने की मान्यता

बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की एक मान्यता यह भी है कि जब वे यहाँ पहुंचते है तो जिन चप्पल-जूतों को पहन कर वे यहाँ आते है उनको वापिस जातें समय यहीं छोड़ देते है. उन भक्तों का मानना है कि जो दुःख-दर्द, रोग, कष्ट वे अपने साथ लेकर आते

है उन को वही त्याग कर एक नए सुखद जीवन की शुरुआत हेतु वे ऐसा करते हैं |

 

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