परचा गैलेरी :
 
 
24. सिरोही निवासी एक अंधे साधु को परचा

कहा जाता है कि एक अन्धा साधु सिरोही से कुछ अन्य लोगो के साथ "रूणिचा" के लिए रवाना हुआ था । ये पैदल चलकर रूणिचा आ रहे थे ।

 

थक जाने के कारण इन्होने एक गाँव में पहुँचकर रात्रि विश्राम किया । रात को जगने पर ये लोग अंधे को वाही छोड़कर चले गये ।

 

आधी रात को जब अंधा साधु जगा तो वहां पर कोई नहीं मिला और इधर-उधर भटकने के पश्चात् वह एक खेजड़ी के पास बैठकर रोने लगा । उसे अपने अंधेपन पर आज इतना दुःख हुआ जितना और कभी नहीं हुआ था ।

 

रामदेवजी ने अपने भक्त के दुःख से द्रवीभूत होकर उसके नैत्र खोल दिए और उसे दर्शन दिए । उस दिन के बाद वह साधु वहीँ रहने लगा । उस खेजड़ी के पास रामदेवजी के चरण (पघलिए) स्थापित करके उनकी पोजा किया करता था । कहा जाता है वही पर उस साधु ने समाधी ली थी ।

 

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