परचा गैलेरी :
 
 
19. हरजी भाटी को परचा

रामदेवरा से कुछ ही मील दूर एक स्थान पर उगमसी भाटी नामक एक क्षत्रिय भेड़-बकरियां चरा कर जीवन यापन करते थे । वे रामदेव जी के परम भक्त थे और नित्य ही रामदेव जी का कीर्तन करते थे । बाबा की कृपा से उनको पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई, उसका नाम हरजी

रखा। हरजी जब 15 साल के थे तब वे एक दिन जंगल में भेड़ बकरियां चरा रहे थे । तभी वहां पर रामदेव जी साधू वेश धारण करके पधारे उन्होंने हरजी से भूख मिटाने के लिए बकरी का दूध माँगा । हरजी ने कहा " महाराज ! मेरी बकरी तो अभी ब्याही नहीं हैं और बिन ब्याही बकरी के थनों से दूध कैसे आएगा? आप का सत्कार न करने से में बड़े संकट में पड़ गया हूँ ।"

 

साधू ने कहा "भक्त ! इस गर्मी में तपती रेत पर चलकर में बड़ी दूर से आया हूँ । मुझे तो तुम्हारी समस्त बकरियों के थनों में दूध दिख रहा हैं, परन्तु तुम मना कर रहे हो । लो यह कटोरा, इसमें दूध निकाल लाओ ।"

 

योगी से डरता हुआ कि कहीं यह शाप न दे दे हरजी कटोरा लेकर एक बकरी के पास आकर उसको दुहने लगा । देखते ही देखते वह कटोरा बकरी के दूध से भर गया । यह देख हरजी को बड़ा आश्चर्य हुआ । उसने उस साधू को वह कटोरा देकर कहा " हे महाराज ! आप कौन हैं? में अज्ञानी आपको पहचानने में गलती कर रहा हूँ ।" तभी रामदेव जी ने हरजी को अपने असली रूप में दर्शन दिए और हरजी को आशीर्वाद देते हुए अंतर्ध्यान हो गये । उसी दिन से हरजी भाटी प्रभु की भक्ति में लग गया और आगे चलकर बाबा के सेवक के रूप में जाना गया ।निकाल लाओ ।"

 

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