Baba Ramdev ji se judi manyatayein

जय बाबा री लोक देवता बाबा रामदेवजी पुरे भारत में प्रसिद्ध है। आज इस आर्टिकल में हम बाबा रामदेवजी जिन्हे रामसापीर के नाम से भी जाना जाता है , उन्ही से जुडी कुछ मान्यताओं के बारे में जानेंगे।

Baba Ramdev ji se judi manyatayein

बाबा रामदेवजी से जुडी मान्यताएं –

जय बाबा री लोक देवता बाबा रामदेवजी पुरे भारत में प्रसिद्ध है। आज इस आर्टिकल में हम बाबा रामदेवजी जिन्हे रामसापीर के नाम से भी जाना जाता है , उन्ही से जुडी कुछ मान्यताओं के बारे में जानेंगे।

Baba Ramdev ji se judi manyatayeinइन मान्यताओं में सबसे पहली मान्यता बाबा रामदेवजी के घोड़े से जुडी है।

घोड़लियो –

घोड़लियो घोड़े का ही अपभ्रंश शब्द हैं। बाबा रामदेव जी की सवारी होने के कारण से घोड़लियो सदा ही भक्तों के बीच
पूजनीय रहा है।बाबा को बचपन से ही घोड़लियो अतिप्रिय रहा हैं। एक समय बाबा ने अपनी माता मैणादे से कपडे का बना घोडा
मंगवाने की हठ कर ली।

Ghodaliyo

बहुत समझाने पर भी रामदेव ना माने तब बालहठ के आगे हार मानकर माता ने एक रुपा नमक दरजी को कपड़े का
घोड़ा बनाने हेतु आदेश दिया एवं उसे बहुमूल्य वस्त्र एवं रत्न आदि प्रदान किये। रूपा दरजी के मन में लालच वास कर गया एवं उसने उन बहुमूल्य वस्त्रों एवं रत्नों को घोड़लियो बनाने में उपयोग का

करते हुए कपड़े के पूर (चीथड़े) का उपयोग करते हुए घोड़ा बना कर माता मैणादे के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। परन्तु लीलाधारी रामदेव को सारा वृतांत पहले से ही ज्ञात था। बाबा ने घोड़े के ऊपर चढ़कर खेलने की इच्छा प्रकट की

• एवं जैसे ही प्रभु घोड़े पर सवार हुए उसे आकाश की ओर उड़ा दिया।

यह देख कर घबराई माता मैणादे ने रूपा दरजी को संदेह की दृष्टि से देखते हुए पूछा कि तुमने इस घोड़े को बनाते हुए चकिया, तब रूपा दरजी ने अपनी गलती मानते हुए स्वीकारा कि लालचवश मैंने बहुमूल्य वस्त्रों एवं रत्नों की जगह कपड़े के पूर से घोड़ा बना दिया था एवं वह बाबा को हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगा कि कृपया आप नीचे उतरे एवं मुझे क्षमा करें।

यह देख बाबा ने वापिस घोड़लिया धरती पर उतरा एवं रूपा दरजी को क्षमा करते हुए कहा कि कभी भी लालचवश कार्य न करते हुए परिश्रम करना ।

बाबा के भक्तों कि मान्यता हैं कि बाबा को कपड़े का बना घोडा चढाने से पुत्र संतान प्राप्ति होती हैं। इसी कारण घोड़लिया बड़ी आस्था से पूजा जाता हैं एवं भक्तगण अपने घर के मंदिर में भी घोड़लिये की पूजा करते हैं।

 

डाली बाई का कंगन –

 

बाबा रामदेव समाधी परिसर में पत्थर का बना डाली बाई का कंगन सभी भक्तों में आस्था का प्रतीक हैं। डाली बाई रामसापीर की मुंहबोली बहन थी जो की उनको एक झाळ (एक तरह का पेड़ के नीचे मिली थ। पेड़ की डाल के नीचे सोते हुएपायी जाने कि वजह से उनका नाम बाबा ने डाली बाई रखा और उनको अपनी छोटी बहन का दर्जा दिया था।

dalibai-kangan

डाली बाई का कंगन – जम्मा जागरण करने वाले रिखियों के पास ही स्थित हैं। देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी सभी कष्ट, पीडा, व्याधि आदि समस्याओं के निराकरण के लिए डाली बाई के कंगन के अंदर से निकलते हैं। मान्यता हैं कि डाली बाई के कंगन  dali bai ka kangan – से निकलने वाला भक्त अपनी सभी सांसारिक समस्याओं से मुक्ति पा लेता हैं एवं रोग एवं कष्ट मुक्त होते हैं। बाबा के दर्शनाथ आने वाले सभी श्रद्धालु इस कंगन से निकल कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।

गूगल धूप –

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गुगल एक प्रकार की दुर्लभ मरुस्थलीय औषधि जो कि विभिन्न प्रकार कि व्याधियों के उपचार में काम आती हैं। यह मुख्यतया राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में पायी जाती हैं। गुग्गल पेड़ों की छाल से निकला स्त्राव हैं जो की गोंद कि तरह दिखता है। औषधीय गुण के अलावा इसकी सुगंध बहुत ही मनमोहक होती है जिस वजह से लोग इसे धूप के रूप में भी उपयोग करते हैं।

manyata – मान्यता हैं कि बाबा के भक्त बाबा को प्रसन्न करने हेतु प्रसाद से ज्यादा गुग्गल धूप का चढ़ावा चढ़ाते
हैं एवं घर में भी गुग्गल धूप का खेवण करते हैं। गुग्गल धूप की महत्ता का वर्णन इस दोहे में किया
गया हैं |

हरजी ने हर मिल्या सामे मारग आय

पूजण दियो घोड़ल्यो धूप खेवण से बताय

बाबा के परम भक्त हरजी भाटी जब बाबा से एक बार किसी मार्ग में मिले तब बाबा ने हरजी भाटी को कहा कि हे परम भक्त हरजी इस संसार में जितने भी मेरे भक्त मेरी भक्ति करते हैं उन सब को यह सन्देश पहुँचाना कि गुग्गल धूप का खेवण करने से उनके घर में सुख शांति और समृद्धि रहेगी एवं वैभव का वास रहेगा।

बाबा के भक्त आस्थास्वरुप गुग्गल के अलावा भी कई अन्य धूर्षो यथा बत्तीसा, आशापुरी आदि का उपयोग करते हैं एवं पीरो के पीर  रामसापीर में श्रद्धा रखने वाले मुस्लिम भक्तजन भी लोबान धूप का उपयोग करते बाबा की आराधना करते हैं।हुए.

इस प्रकार गूगल धुप काफी ज्यादा प्रचलित हुवा तथा यह बाबा रामदेवजी से जुडी प्रमुख मान्यताओं में से एक है।

रामसापीर से जुडी अन्य मान्यताओं को जानने के लिए यहां  क्लिक करे और जाने Baba Ramdev ji se judi manyatayein के बारे में।

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